Saturday, 10 October 2020

युवा कांग्रेस की महिला पदाधिकारी द्वारा युवा दलित के उत्पीड़न की मेरी कहानी । न्याय कभी एकतरफा नही हो सकता........

न्याय कभी एकतरफ़ा नही हो सकता ... युवा कांग्रेस की तत्कालीन पदाधिकारी द्वारा युवा दलित की उतपीड़न की मेरी सच्ची कहानी ...हिन्दी के सबसे प्रख्यात लेखकों में से एक मुंशीप्रेमचंद जी कहते हैं, “न्याय वह है जो कि दूध का दूध, पानी का पानी कर दे, यह नहीं कि खुद ही कागजों के धोखे में आ जाए, खुद ही पाखंडियों के जाल में फँस जाए।” किसी भी सभ्य समाज की स्थापना के लिए कुछ आदर्शों और मूल्यों की आवश्यकता होती है। बिना मूल्यों के समाज अराजकता की ओर चला जाता है और उसका विघटन सुनिश्चित होता है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि आखिर वो कौन से मूल्य और आदर्श हैं जो सभ्य समाज की स्थापना के लिए किसी स्तम्भ का काम करते हैं जो उस समाज को टिकाए रहता है। यों तो संसार भर के महान दार्शनिकों, चिंतकों और बुद्धिजीवियों ने इसको लेकर समय-समय पर अपने अलग-अलग विचार दिए हैं, लेकिन इन सभी ज्ञानियों में जिस एक मूल्य को लेकर लगभग आम सहमति है, वह है न्याय का मूल्य। न्याय के बिना समाज की जड़े मजबूत हो ही नहीं सकती। न्याय समाज के हर सदस्य को यह विश्वास दिलाता है कि भले ही वह कितना भी कमज़ोर और लाचार क्यों न हो, उसके साथ गलत नहीं किया जाएगा। जिस दिन समाज के किसी भी एक वर्ग को यह लगने लगता है कि मौजूद व्यवस्था में उसके साथ न्याय नहीं हो रहा, वहाँ विद्रोह सुनिश्चित हो जाता है।भारत में न्याय केवल एक दार्शनिक कान्सेप्ट नहीं है, बल्कि हम सब की रोजमर्रा की ज़िंदगी से जुड़ा हुआ एक सिस्टम है जिसके लिए हमने संविधान बनाया है, कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायका को स्थापित किया है, लोकतान्त्रिक रूप से अपनी सरकार चुनने का खाका रखा है, जो हमारे अधिकारों की रक्षा कर सके और कानून का राज स्थापित कर सके। लेकिन कई बार इतनी आदर्शवादी व्यवस्था में भी कई कमियां पैदा हो जाती हैं जिसका गलत फायदा उठा कर कुछ लोग किसी व्यक्ति का पूरा जीवन भी खराब कर सकते हैं। कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ है। 
न्याय की लड़ाई में बहुत कुछ खोया ....
मेरा नाम योगेश आत्रेय है। मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूँ और दिल्ली के मंगोल पूरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुका हूँ। अपनी राजनीतिक पारी कि शुरुआत से ही मैं जनता के मुद्दे उठाता रहा और उनको लेकर संघर्ष करता रहा। चूंकि दलित समुदाय से आने कि वजह से उनकी समस्याओं को मैं बहुत अच्छी तरह से समझता था, इसी लिए दलितों के उत्पीड़न के खिलाफ मैं बहुत मुखर रहा। जनता के बीच मेरी लोकप्रियता और काँग्रेस सरकार के खिलाफ निरंतर खड़े होने की वजह से कॉंग्रेस पार्टी की आँखों में चुभने लगा था। राजनीतिक रूप से वो मुझे परास्त नहीं कर पा रहे थे, इस लिए उन्होंने मुझे फ़साने के लिए एक षड्यन्त्र रचा। 2013 में विजय विहार थाने में मेरे खिलाफ तत्कालीन युवा कांग्रेस की महासचिव ने शिकायत दर्ज कराते हुए यह आरोप लगाया की मेरे द्वारा उसके साथ 2007 में बलात्कार किया गया था। रोहिणी कोर्ट में ट्रायल चला और अन्तः कोर्ट ने यह माना की बलात्कार का आरोप लगाने वाली महिला के बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पुलिस की जांच में तमाम दावे और आरोप झूठे साबित हुए। युवती ने अपनी शिकायत में मुझसे अपनी पहली मुलाकात और बलात्कार 2007 में होना का बताया जबकि एफआईआर 2013 में दर्ज़ कराई। इसके अलावा उन्होंने जिन-जिन होटलों और भवन में लगातार आना-जाना, मिलना और बलात्कार होना बताया वे सभी मोबाइल कॉलडिटेल्स और होटल के रिकॉर्ड की जांच के बाद झूठे साबित हुए। कोर्ट ने माना की आरोप लगाने वाली महिला पढ़ी लिखी है,सक्रीय राजनीति में है, पदाधिकारी है और निगम का चुनाव लड़ चुकी है। ऐसे में इनके दावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। तमाम सबूतों के आधार पर कोर्ट ने जुलाई 2018 में मुझको बाइज्जत बरी कर दिया।भले ही मुझे न्यायालय ने बरी कर दिया हो, लेकिन एक सवाल जो मेरे मन में हैं और जो शायद हमेशा ही बना  रहेंगे। पाँच साल चले इस मुकदमे ने मेरे पूरे घर, परिवार, सामाजिक छवि, राजनीतिक करिअर और व्यक्तित्व को बर्बाद कर के रख दिया। अदालत की कार्यवाही के इतर जो मीडिया ट्रायल मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ चला, उस मुकदमे में मुझे बिना सोचे समझे ही बस आरोप लगने पर मुजरिम बना दिया। और वो भी ऐसा वैसा मुजरिम नहीं – वहशी, दरिंदा जैसे असामाजिक अपशब्द मेरे लिए मीडिया द्वारा प्रयोग किए गए जिस कारण मैं और मेरा परिवार डिप्रेशन में चल गया। लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता के पक्ष में मैं और मेरा संगठन पहले भी खड़े थे और आज भी खड़े है, लेकिन क्या उस मीडिया को भी आत्म-मंथन करने की आवश्यकता नहीं है, जो बिना सोचे-समझे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अपना ही एक ट्रायल चालू कर देती है जिसमे सजा भी तत्काल दे दी जाती है। क्या ऐसा कर के वो देश के संविधान और उस न्यायपालिका का अपमान नहीं कर रही जिसमे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और अपने पक्ष को न्यायालय के समक्ष रखने का प्रावधान है? क्या वो उस व्यक्ति से कभी क्षमा मांगेंगे जिसके खिलाफ उन्होंने ट्रायल चलाया लेकिन जिसे न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया? मेरे साथ जो हुआ मुझे उसका दर्द तो है इसीलिए मैं नहीं चाहता कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति का ‘मीडिया ट्रायल’ न हो। देश में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अनेकों कानून बने हैं जो बहुत जरूरी भी हैं। नारी की सुरक्षा से महत्वपूर्ण कुछ हो नहीं सकता और मैं मानता हूँ कि ऐसे कानूनों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। लेकिन हमें यह भी ध्यान देना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति इन कानूनों का दुरुपयोग न करे और किसी मासूम को गलत मामले में न फंसा पाए। क्योंकि जब ऐसा होता है तब उस आरोपी व्यक्ति के साथ-साथ उसके पूरे परिवार को अपमान झेलना पड़ता है। परिवार कि महिलाओं को इसका सबसे अधिक खामियाजा उठाना पड़ता है। ऐसे में यह ध्यान देने योग्य है कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बने कानून किसी दूसरी महिला का परिवार न उजाड़ दे। पाँच सालों में जो मैंने खोया वो तो कभी मुझे वापस नहीं मिलेगा इसलिए मैं नहीं चाहता कि मेरे परिवार के साथ जो हुआ वो कभी किसी और के साथ हो। कानून का गलत इस्तेमाल करने वालों को भी कड़ी सजा दी जानी चाहिए। मुझे कानून पर, अदालत पर भरोसा था कि मुझे न्याय मिलेगा। कोर्ट के इस फैसले से मेरा ही नहीं बल्कि आम जनता का भी कानून और अदालत पर भरोसा बढ़ा है। और अंततः मैं मानता हूँ कि सत्य परेशान हो सकता पराजित नहीं।

Saturday, 6 August 2016

भारतीय राजनीति में राजनाथ सिंह ने रचा महाइतिहास, स्‍वर्णिम अक्षरों में दर्ज हुई मोदी सरकार, कांग्रेस का सलाम, दुनिया दंग !

राजनाथ सिंह ने पकिस्तान जाकर बहुत अच्छा किया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ये कह कर काम नहीं चलता कि आप सदा कुट्टी कर के बैठे रहेंगे और संबंधों की औपचारिकताएं भी नहीं निभाएंगे।  और फिर ये तो दक्षेस देशों की बैठक थी।  याद रखना चाहिए कि शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ और अमेरिका भी आपस में बात करते थे।  इसलिए गृह मंत्री की उन आलोचनाओं पर कान नहीं धरने चाहिए जो कह रहे हैं कि उन्हें पाकिस्तान नहीं जाना चाहिए था। मूल बात यह है कि वहां जाकर उन्होंने क्या किया।  क्या उन्होंने औपचारिकताओं में पड़ कर राजनयिकों की तरह घुमा फिराकर बात की या फिर मज़बूती के साथ भारत की बात रखी?

मुझे इन्टरनेट पर एक पाठक की ये टिप्पड़ी बहुत ही सार्थक लगी।  उसने लिखा है  "राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के 
सबसे बड़े उद्योग पर कड़ा प्रहार किया।  वह उद्योग जिसकी पकिस्तान की जीडीपी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।" यानि की आतंकवाद। भारत के गृह मंत्री को इस बात के लिए 100 में से 100 नंबर दिए जाने चाहिए कि वे बेकार के दिखावे में नहीं पड़े।न तो पाकिस्तान के गृहमंत्री निसार अली  खान से मिलते हुए और ना ही अपनी बात कहते हुए। उन्होंने कहा कि एक देश का आतंकवादी दूसरे देश के लिए स्वतंत्रता सेनानी नहीं हो सकता। राजनाथ सिंह ने नाम तो नहीं लिया मगर इशारा साफ़ था।  पाकिस्तान आतंकवाद से लड़ने के नाटक करे और फिर भारत के खिलाफ हथियार उठाने वाले आतंकवादी बुरहान वानी को स्वतंत्रता सेनानी बताये ये कैसे चलेगा ? उसके लिए पाकिस्तान मे बंद आयोजित किया जाए ये कैसा दोगलापन है?

ये सही है की पाकिस्तान ने आतंकवाद  को अपनी विदेश नीति के औजार के तौर पर इस्तेमाल किया है और ये भी सही है कि अब खुद पाकिस्तान भी इस आतंकवाद का शिकार हो रहा है। पकिस्तान जब तक कश्मीर और भारत को लेकर अपनी नीति मे बुनियादी बदलाव नहीं लाएगा वह इस मुश्किल से बहार नहीं निकल सकता। आज तो वह दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन कर रह गया है।किसी वक़्त दुनिया उसके झांसे में आ भी जाती थी मगर आज तो उसके आतंक के व्यापारी सऊदी अरब तक जाकर ये खूनी खेल खेलने लगे हैं। अगर सऊदी भी पाकिस्तान से किनारा कर लेंगे तो फिर उसका क्या होगा?

यहाँ राजनाथ सिंह ने जो दूसरी नसीहत पाकिस्तांन को दी है अगर वह उस पर अमल करे तो वह  खुद के बनाये  इस खूनी जंजाल से बाहर निकल सकता है। राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में कहा कि आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है।  आप एक आतंकवादी को अच्छा कहकर गले नहीं लगा सकते और दूसरे को बुरा कह कर मार नहीं सकते। बात साफ़ है।  पकिस्तान आतंकवाद को टुकड़ों में बाँट कर नहीं देख सकता।  अगर कश्मीर में हथियार उठाने वालों को पाकिस्तान स्वतंत्रता सेनानी बोलेगा तो फिर पख्तूनों और बलूचियों के लिए लड़ने वाले भी तो यही तर्क ले सकते है? यानि आप हमेशा मीठा मीठा गप और कड़वा कड़वा थू नहीं कर सकते। 
वैसे तो पकिस्तान ने राजनाथ सिंह के भाषण के बाद ही भारत और कश्मीर को लेकर अपनी घिसीपिटी बातें दोहरा दीं।ऐसा अपेक्षित ही था।  और आप उम्मीद भी नहीं करते कि  अचानक से एक देश अपनी वो भाषा बदल देगा जो वह 60 साल से बोलता आया है।  मगर यह पकिस्तान के लिए ही बेहतर होगा कि गृहमंत्री राजनाथसिंह ने पूरे भारत की भावना को अभिव्यक्त किया है उसपर वह ठन्डे दिमाग से गौर करे और अपनी नीतियों में बदलाव लाये। नहीं तो पकिस्तान के लिए आने वाला अंतरराष्ट्रीय माहौल ठीक नहीं होगा।  कश्मीर में वह भारत को जितना नुकसान पहुंचा सकता था पहुंचा चुका है।  भारत में इससे निपटने की इच्छाशक्ति, ताकत, कौशल, साधन, धैर्य और हौसला है।  मगर पाकिस्तान नहीं बदला तो शायद संभल नहीं पायेगा।  

Friday, 16 October 2015

Yogesh Attray गाँव मोहलडिया नीमराना ज़िला अलवर ,राजस्थान मे उजाड़े गये हरिजन परिवारों के पुनर्वास के संबंध मे या याचिका पर अनुसूचित जाति आयोग ने जारी किया नोटिस

गाँव मोहलडिया नीमराना ज़िला अलवर ,राजस्थान  मे उजाड़े गये हरिजन परिवारों के पुनर्वास के संबंध मे या याचिका पर अनुसूचित जाति आयोग ने ज़िला अधिकारी अलवर व नेशनल हाईवे अथोरटी को नोटिस जारी कर सात दिन मे जबाब देने का निर्देश जारी किये ।

Wednesday, 23 September 2015

Rajnath Singh देश की सीमा दुंगती लेह की चौकी पर रात मे रूकने वाले देश के पहले गृहमंत्री माननीय राजनाथ सिह जी

देश की सीमा दुंगती लेह की चौकी पर रात मे रूककर जवानों को होने वाली कठिनाइयों का प्रत्यक्ष अनुभव करने वाले देश के पहले गृहमंत्री माननीय राजनाथ सिह जी ने जवानों की सुविधाओं व देश की सीमा पर सड़क बनाने के निर्देश जारी किये ।



Tuesday, 26 May 2015

Rajnath Singh गृहमंत्री माननीय राजनाथ सिह की सुरक्षा मे चूक किसी बडे हमले का पूर्व अभ्यास तो नही ?

गृहमंत्री माननीय राजनाथ सिह की सुरक्षा मे चूक किसी बडे हमले का पूर्व अभ्यास तो नही ?

देश के गृहमंत्री माननीय राजनाथ सिह जी को आतंकवादियों से जान ख़तरा है देश की राजधानी मे मिडिया रिपोर्ट (मिडिया रिपोर्ट संलग्न)के अनुसार दिल्ली मे माननीय राजनाथ सिह जी सुरक्षा दूसरी बार ख़तरे मे पडी है ।
माननीय राजनाथ सिह जी देश की धरोहर है ओर वह जिस तरीके से देश मे आतंकवाद ,नक्सलवाद ,जम्मू कश्मीर की सीमा पर पाकिस्तानी आतंकवादियों के विरूद्ध सक्त कार्यवाही कर देश से आतंकवाद को समाप्त करने मे लगे हुए है उससे घबराकर ये सब माननीय राजनाथ सिह की जान के दुश्मन बने हुए है ।

इन सब को देखते हुए मुझे यह आशंका है कि दिल्ली मे माननीय राजनाथ सिह के कार्यक्रमों मे सुरक्षा मे चूक कही किसी बडे हमले का पूर्व का अभ्यास तो नही है ? यदि भविष्य मे माननीय राजनाथ सिह जी के उपर कोई भी जान लेवा हमला या कोई अन्य घटना व दुर्घटना घटती है तो उसके लिये दिल्ली पुलिस व सुरक्षा मे लगी सभी एजेन्सियाँ ज़िम्मेवार होगी ।

योगेश आत्रेय
चेयरमैन भारतोदय मिशन ट्रस्ट(पंजीकृत)
पूर्व भाजपा विधान सभा प्रत्याशी दिल्ली 
189/4 पाकेट 14 सैक्टर 24 रोहिणी दिल्ली -110085
मोबाईल: 9868229307 

Friday, 17 April 2015

Yogesh Attray ,Delhi police दिल्ली पुलिस रोहिणी साउथ थाने मे दलित महिलाओं पर अत्याचार मे दिल्ली पुलिस आयुक्त 20अप्रेल 2015 को SCआयोग मे तलब ।

दिल्ली पुलिस रोहिणी साउथ थाने मे दलित महिलाओं पर अत्याचार मे दिल्ली पुलिस आयुक्त 20अप्रेल 2015 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार मे तलब । 

Tuesday, 23 September 2014

Rajnath Singh अपने सार्वजनिक जीवन में मैंने पूंजी के तौर पर केवल विश्वनीयता ही अर्जित की है। मुझे पशुवत जीवन जीना स्वीकार नहीं है। राजनाथ सिह""

" अपने सार्वजनिक जीवन में मैंने पूंजी के तौर पर केवल विश्वनीयता ही अर्जित की है। मुझे पशुवत जीवन जीना स्वीकार नहीं है। राजनाथ सिह""

प्रधानमंत्री के साथ मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि नरेंद्र मोदी से उनके रिश्ते 'बहुत पवित्र, भावुक और गहरे' हैं और वह सुनिश्चित करेंगे कि 'व्यक्तिगत नुकसान' के बावजूद ये खराब नहीं हों।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में मोदी की सर्वोच्चता 'बहुत स्वाभाविक है न कि थोपी हुई।' वह तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के गृहमंत्री सरदार पटेल से और अटल बिहारी वाजपेयी के लालकृष्ण आडवाणी से रिश्तों के आलोक में पूछे जा रहे सवालों के जवाब दे रहे थे।
मोदी से रिश्तों के बारे में गृहमंत्री ने कहा, 'मैं आपको बताना चाहता हूं कि पिछले डेढ़ साल में, हमारे रिश्ते बहुत गहरे हुए हैं। वह देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं जो देश को उसके कठिन समय से उबार रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'जो हमारे संबंधों के बारे में अटकलें लगा रहे हैं वे इसकी गहराई से पूरी तरह अनजान हैं। ये इतने पवित्र, भावुक और गहरे हैं कि कोई इसे बिगाड़ नहीं सकता है। मैं खुद के व्यक्तिगत नुकसान पर भी ऐसा नहीं होने दूंगा। अपने सार्वजनिक जीवन में मैंने पूंजी के तौर पर केवल विश्वनीयता ही अर्जित की है। मुझे पशुवत जीवन जीना स्वीकार नहीं है।'
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सिंह ने इन अटकलों को दूर करने का प्रयास किया कि मोदी और उनके बीच कुछ गड़बड़ चल रही है। उन्होंने कहा, 'अगर मैंने किसी व्यक्ति से गहरे व्यक्तिगत और भावुक रिश्ते बना लिए हैं तो मैं उसे किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने की सोच भी नहीं सकता। मैं अपने किसी करीबी को केवल इसलिए नुकसान पहुंचाने का पाप करने की सोच भी नहीं सकता कि उसके साथ मेरे कुछ व्यक्तिगत मतभेद हो गए हैं। यह मेरी राजनीति नहीं है।'
राजनाथ सिंह हालांकि ऐसा आभास देते दिखे कि 'किन्हीं भ्रमों के चलते' कुछ लोगों को उनसे शिकायतें हो सकती है। उन्होंने कहा, 'मामलों को हल करने के लिए मैं उनसे बातचीत को तैयार हूं। उत्तर प्रदेश में मेरे मित्रों के दुश्मन बन जाने पर भी आपने देखा होगा कि मेरे आचरण में निरंतरता बनी रही है। मैं अपने खराब से खराब दुश्मन के प्रति भी किसी अपमानजनक शब्द का प्रयोग नहीं करता और कभी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाता।' उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बीच कथित मतभेदों की अटकलें 'इतिहास में बनी रहेंगी' और भविष्य अलग होगा तथा पूर्व को दोहराएगा नहीं।
गृहमंत्री ने कहा, 'इस इतिहास को यहीं खत्म करें और आगे बढ़ें। अटलजी और आडवाणीजी के बीच मीडिया में चल रही गलतफहमियों के बावजूद दोनों में बहुत सौहार्दपूर्ण और परस्पर सम्मान के रिश्ते रहे हैं।'